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पिटोलमालवा LIVE

सरकारी दवाखाने के परिसर में डाक्टर की जगह भतीजा कर रहा प्रेक्टिस, मरीजों से कर रहा वसुली 30 दिनों से डाक्टर अंकल ट्रेनिंग पर

पिटोल। कुँवर निर्भयसिंह

गत 7 दिसम्बर 18 से यहां पदस्थ डाक्टर अंतिम बडोले के टेऊनिंग पर होने के बाद से पिटोल प्राथमिक स्वा. केन्द्र में मरिजों के प्रति बरती जा रही लापरवाही एवं शुक्रवार को प्रसुति के बाद कमला सकरिया मेडा निवासी बावडी बडी की महिला की मौत के बाद जनप्रतिनिधी जब पिटोल प्राथमिक स्वा. केन्द्र पहुंचे तो वहां का माजरा ही कुछ ओर था ट्रेनिंग पर गऐ डाक्टर की जगह कोई ओर डाक्टर नहीं था सिर्फ एक एएनएम थी जिसनें महिला की डिलेवरी करवाई।महिला ने एक स्वस्थ बालक को यहां जन्म तो दिया किन्तु उसकी हालत नाजुक होते देख जब परिजन उसे दाहोद ले जा रहे थे कि रास्ते में महिला की मौत हो गई। ग्रामीणों का कहना था कि यदि यहां डाक्टर होते तो संभवत: महिला को बचाया जा सकता था।
दुसरी ओर यहां पदस्थ डाक्टर अंतिम बडौले के घर पर सरकारी परिसर में ही उनका भतीजा यशवंत पिता अनारसिंह बडौले जिसके पास न कोई डिग्री है न अनुभव मरीजों के जीवन के साथ खिलवाड करता पाया गया ।डाक्टर के भतीजे द्वारा सरकारी अस्पताल में की जा रही प्रेक्टिस पर आपत्ती के बाद भतीजे ने दो जनपद सदस्यों बलवंतसिंह मेडा व पेमा भाबोर को ही धमकी दे डाली जो करना है कर लो कोई मेरा कुछ नहीं बिगाड सकता।
जनपद सदस्यों के साथ बदसलुकी के बाद मामले ने तुल पकडा बडी संख्या में ग्रामीण वहां एकत्रित हुवे पत्रकार भी वहां पहुंच गऐ जहां भतीजा यशवंत बडौले मउडी डुंगरी गांव की एक 55 वर्षिय महिला तुलसी पति केकडीया को व पिटोल के भरत भाई घोडीवाले को जमीन पर लेटाकर स्लाईन चढा रहा था। गौरतलब है कि डाक्टर अंकल का यह भतीजा गत एक माह से अपनी ऐसी निजी चिकित्सा सरकारी परिसर में ही चला रहा है किन्तु इसे यहां कोई देखने वाला नहीं है। अपितु यह बात सामने आई है कि अस्पताल में आने वाले मरिजों को वहां का स्टॉफ ईलाज के लिये इन डाक्टर अंकल के भतिजे के पास भेज देते है जहां वह डाक्टर साहब से फोन पर मर्ज बताकर दवाई कर पैसा लेकर मरिज को घर भेज देता है।
मरिजों को पता ही नहीं कि उनका ईलाज कर रहा वह कौन?
भतीजे के हाथों अपने मर्ज का ईलाज करवा रही कमलाबाई मेडा ने बताया कि उसे पता ही नहीं है कि ईलाज करने वाला कौन है वह तो सरकारी अस्पताल में ईलाज के लिये आई थी नर्सो नें उसे यहां भेज दिया अब हम अनपढ लोग क्या जानें कि यह डाक्टर है या कोई ओर।
सीएमएचओ के आते ही भागा भतीजा…….
मामले के तुल पकडने के बाद जिला मुख्यालय से सीएमएचओ के यहां आते ही यशवंत परिसर छोड कर भाग खडा हुआ। एकत्रित जन प्रतिनिधियों नें महिला की प्रसुति में मौत व डाक्टर के भतिजे की कारगुजारी की जानकारी से अवगत कराया ।
इन अनियमिताओं को बताया
– यहां पर वर्तमान में पदस्थ आयुष डाक्टर नियमित नहीं आ रहे है।
– डाक्टर ड्युटी टाईम में ही निजी पे्रक्टिस कर पैसा ले रहा है।
– दबे छुपे प्रसुताओं से या उनके परिजनों से 500 से 1000 रु. तक की राशि वसुलने की बात जनप्रतिनिधियों नें कही।
– दवाईयां मरीजों को नहीं मिल पा रही है जिससे उन्हें बाहर से दवाईयां लाना पडती है।
इन्होने कहा …
जनपद सदस्यों व ग्रामीणों द्वारा मामला संज्ञान में लाया गया है मामले की जांच करवाकर दोषियों के खिलाफ कार्यवाही की जावेगी अभी उन्हें कारण बताओ नोटीस भेजे जा रहे है।
-डी एस चौहान, मुख्य जिला चिकित्सा अधिकारी झाबुआ।

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