);
मालवा LIVE

SDM की तुगलकी रवैये से प्रशासन एक गलत सोच की अगुवाई कर रहा है

अनिल मुथा की रिपोर्ट
पेटलावद की कई गौरवशाली परम्पराओ पर हम नाज कर सकते है।एक परम्परा है राष्ट्रीय पर्व को मनाने का।इस पर्व को मनाने के हमारे तरीके को सर्वव्यापी प्रशंशा मिलती रही है।समय समय पर हमारी कार्य शेली में आमूल चूल परिवर्तन होते रहेएजो रचनात्मक होकर प्रशंसनीय थे।पहले हम जानते है कि हमारी परंपरा क्या थी।
हम सबसे बड़े राष्ट्रीय पर्व के रूप में 26 जनवरी को मनाते आ रहे है।इस दिन के लिए सबसे बड़ा और जिम्मेदारी का काम करती आ रही है नगर परिषद।पहले नगर परिषद पेटलावद के समस्त स्कूलों के प्रोग्राम के लिये स्कूल मैदान में मंच सजाती है।3 से 4 घण्टे के देशभक्ति से प्रभावित प्रोग्राम होते है। जिसमे समस्त जनप्रतिनिधि ओर प्रशासन के अधिकारी कर्मचारी आपसी तालमेल के साथ भागीदारी करते है।करीब 8000 पैकेट मिठाई के वितरित किये जाते है।कुल मिलाकर सबकुछ बहुत गरिमा के साथ सम्पन्न होता है।इस दिन लायंस क्लब, शासकीय संस्थाएं ओर नगर परिषद मिलकर स्थानीय प्रतिभाओ का सम्मान करके उन्हें प्रतीक चिन्ह भी वितरित करती है।हर वर्ग की भूमिका ओर मार्गदर्शन को स्वीकारा जाता है।
अब इस बार प्रशासन ने आम जन ओर जनप्रतिनिधियों की भूमिका को सीमित करके कार्यक्रम की पूरी बागडोर अपने हाथ में लेने का निर्णय लिया है।प्रशासन के मुखिया के तौर पर एसडीएम हर्षल पंचोली की कार्यशैली विवादित नजर आ रही है।राष्ट्रीय पर्व जैसे मोके पर किसी भी तरह के प्रयोग की गुंजाइश नही है।जनप्रतिनिधियों की इस मौके पर उपेक्षा निंदनीय है।नगर की गौरवशाली परम्पराओ के साथ छेड़छाड़ नाबर्दाश्त है।नगर में पूर्व में भी दो आई ए एस श्री गुलशन बामरा ओर श्री संकेत भोंडवे ने भी अपनी सेवाएं दी थी।संकेत भोंडवे ने तो 26 जनवरी पर्व को बेहद यादगार बनाने की दिशा में बेहद रचनात्मक भूमिका अदा की थी।कुल मिलाकर दोनो पूर्ववर्ती अधिकारियों ने नागरिको से सामन्जस्थ बनाकर कार्य किया।जबकि तुलनात्मक रूप से हर्षल पंचोली की कार्यशैली तुगलकी नजर आती है।राष्ट्रीय पर्व में अभी कुछ दिन बाकी है।

Related Articles

error: Content is protected !!
Close