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पेटलावद

आंगनवाड़ी भवन की हालत दयनिय….. बच्चों की जिन्दगी हो रहा खिलवाड़

पेटलावद। तन्मय चतुर्वेदी
महिला एवं बाल विकास विभाग की लापरवाहीं का खामियाजा कहीं नन्हें-नन्हें बच्चों पर भारी न पड़ जाए। शासन द्वारा लाखों-करोड़ों रूपयें खर्च कर आंगनवाडिय़ों को आदर्श बनाया जा रहा है, तथा इन आंगनवाडिय़ों में बच्चों के लिए भोजन से लगाकर खेल-खिलाने की व्यवस्था भी होती है।
लेकिन समीप ग्राम केसरपूरा की आंगनबाड़ी केंद्र में करीब 45 बच्चों की जिन्दगी से विभाग खिलवाड़ कर रहा है। यहां का आंगनवाड़ी केन्द्र न तो आदर्श है और ना हीं इस पर रंग-रंगोन किया गया, बल्की भवन पुरी तरह जीर्ण-शीर्ण अवस्था में पड़ा है। इस और विभाग के किसी भी अधिकारी का ध्यान नही है, जबकि आंगनवाड़ी कार्यकर्ता की और से करीब एक वर्ष पूर्व हीं इसकी सुचना जिम्मेदार अधिकारियों को दी गई थी। इसके बाद में इंजिनियर भी मौके पर आकर भवन मौका मुआवना कर गयें थे, लेकिन आज तक उक्त भवन में कोई सुधार नहीं किया गया है। आंगनवाड़ी भवन की दिवारों में बड़ी-बड़ी दरारे पड़ गई है जिससे यह भवन कभी भी धराशाहीं हो सकता है और किसी बडे हादसें से इंकार नहीं किया जा सकता।
इसी जर्जर भवन में आंगनवाड़ी संचालित की जा रहीं है, जहां करीब 45 छोटे-छोटे मासुम बच्चों को बैठाया जाता है। जिम्मेदार विभाग के अधिकारियों ने आज तक इस भवन की सुध नहीं ली तथा जान बुझकर बच्चों की जिन्दगी से खिलवाड़ किया जा रहा है। इस भवन की दयनिय दुर्दशा देखकर पालकगण भी अपनों बच्चों को आंगनवाड़ी में भेजने को सोचनें को मजबुर है। अन्य दुसरा भवन नहीं होने से आंगनवाड़ी कार्यकर्ता को भी मजबुरी में यहां आंगनवाड़ी संचालित करना पड़ रहीं है।
इस संबंध में परियोजना अधिकारी इश्तिा मसानिया से चर्चा की तो उन्होने बताया कि आंगनवाड़ी अन्य जगह शिफ्ट करनें का प्लान चल रहा है, उसके बारें में मीटिंग भी रखी थी, लेकिन कोई भवन नहीं मिलने से वहां आंगनवाड़ी लगाई जा रहीं है। दो चार दिनों में दुसरे भवन की व्यवस्था की जाएगी।

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