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अलीराजपुर

आदिवासी महानायक क्रांतिकारी योद्धा भीमा नायक की 142 वी शहादत दिवस पर श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित

टंटया मामा चौराहे पर क्रांतिकारी भीमा नायक को आदिवासी समाज ने श्रदांजलि अर्पित की

रफ़ीक़ कुरेशी।अलीराजपुर

मालवा निमाड़ के आदिवासी महानायक क्रांतिकारी योद्धा भीमा नायक की 142 वी शहादत दिवस के अवसर पर स्थानीय टंट्या चौराहे पर आदिवासी समाज जनो दुवारा श्रधांजलि कार्यक्रम आयोजित किया गया।  सर्वप्रथम क्रांतिकारी महामानव आदिवासी योद्धा भीमा नायक एवं धरतीपुत्र शिरोमणि महानायक भगवान टंट्या भील मामा के चित्र एवं मूर्ति पर समाज के वरिष्ठ जन दुवारा माल्यानपन कर श्रदांजलि अर्पित की। इस अवसर पर अजाक्स के जिला उपाध्यक्ष रतनसिंह रावत ने कहा कि क्रांतिकारी भीमा नायक का जन्म 1827 में ग्राम ढाबा बावड़ी जिला बड़वानी में हुआ था। जिनके पिता का नाम धनसिंह,माता सुरसी बाई एवं पत्नी का नाम धाबा था। उन्होंने समाज के शोषित एवं गरीबो के उत्थान के लिएे हमेशा साहूकारों से न्याय के लिए संग्रासरत रहे ,इस कारण से वे गरीबों के मशीहा थे।
आकास के जिला महासचिव भंगुसिह तोमर ने कहा कि भीमा नायक आदिवासी भीलों का लड़ाकू योद्धा जिन्होंने 1857 की क्रांति के पहले 1840 से 1864 तक अंग्रेजों के खिलाप हुये,युद्ध की अगुवाई की ओर आदिवासी बहुल क्षेत्रों मालवा निमाड़ में साहूकारों ,जमींदारों ओर धन्नासेठों के छल- कपट ,शोषण, अन्याय एवं अत्याचारो के विरुद्ध लड़ाई लड़ी।1818 में मराठों को खानदेश ओर पश्चिम निमाड़ को हराकर अंग्रेजो ने अपने कब्जे में कर लिया था लेकिन भीमा नायक अपने साथियों के साथ लगातार अपने छेत्र में तीर कमान लेकर संगर्ष कर निमाड़ की जमीन को अंग्रेजो से मुक्त रखा,भीमा की लोकप्रियता ओर आंदोलन से घबराकर अंग्रेजो ने भीमा के साथियों को लालच देकर भीमा को फसाया ओर अंग्रेजी हुकूमत द्वारा उन्हें काला पानी की सजा दी जहा 29 दिसम्बर 1876  को उन्हें फांसी की सजा गुप्त रूपसे दे दी गयी,ये बाते वक़्ताओ द्वारा कही गई।  कार्यक्रम को मोहन कलेश किसान संघ जिलाध्यक्ष, बेठालाल ओहरिया, शांतिलाल चौकियां, विक्रमसिंह चौहान, अरविंद कनेश, जितेंद्र चौहान ने भी सम्बोधित किया। उपस्थित समाजजनो ने भीमा नायक के आदर्श विचारों पर चलने का संकल्प भी लिया।कार्यक्रम का संचालन केरम जमरा द्वारा किया गया।

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