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दान ऐसे दे कि दुसरे हाथ को भी मालूम न पढ़े, वही दान होता है: पं. कमलकिशोर नागर

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09chk-10रफीक कुरैशी। आलीराजपुर
रिश्ता करो तो एक गरीब से जरूर करना, जहां धन का भंडार होता है वहां से कोई खर्च नही करता है वह बचा धन इन तीन चीज दान, भोज या नाश मे काम नही आता है। जहां अधिक मात्रा में धन एकत्रित होता जाता है उसका धन वंश खा जाता है। उसे ही कालाधन कहते है। जिस तरह से दवाईयों पर एस्पारी लिखी होती है वैसे भी ही मनुष्य का अंत होता है। इस दुनिया में धरती पर हर चीज का अंत होता है। अपनी इज्जत अपनी मुठ्ठी में रखना इज्जत गई मतलब नाक कटी बराबर है। बहु व सास को मां बेटी जैसे व पिता पुत्र को भाई बन कर रहाना चाहिए। घर में बडे बुजुर्ग व माता पिता के हाथ पैर व चरण दबाव या मत दबाना लेकिन माता पिता को दबा के मत रखना। उक्त बाते भागवत कथा के सातवे दिन समापन अवसर पर वंृदावन धाम ग्राम छकतला में पं. कमलकिशोर नागरजी ने कही। प्रभु तेरा द्वार न छुटे रे प्रभु तेरा द्वारा छुटे रे छुट जाए संसार रे जैसे भजनों से पांडला मे श्रौतागण झुम उठे।

09chk-12श्री नागरजी ने कथा में बताया कि वनवासी क्षेत्र मे कथा करने का आधार एक ही एक है कि इस क्षेत्र मे कथा के माध्यम से सुधार आए। मनुष्य को भ्रम हो गया है कि मै सब करता हुं लेकिन इन्हे नहीं पता सब ईश्वर करता है। कभी भी सीधे हाथ से दान करो उल्टे हाथ को नही मालुम होना चाहिए तो वह दान कह लाते है। किसी गरीब को बड़े अधिकारी या संपंन लोगो के पास गरीब जाता है तो उसे कोई चाय का नही पुछते है बड़ा कही जाता है तो उसके पास सब पुहंचते है। बडा लोगो के अर्थ बताते हुए कहा कि आधी लेता है ओर आधी छोड़ देता है। इस दुनिया में भरे को भरता है। बेटी बचावो संदेश को समझाते हुए कहा कि पांच सौ साल पहले ही संत तुलसीदास जी लिख गए थे कि बेटा से बेटी से अच्छा है। क्योंकि जब तक नाक आती है तब तक मां को व बहु आई तो उसका हो जाता है। मनुष्य मट्टी का बर्तन नही होता है धडक़ता हुई चैतन्य आत्मा है, मनुष्य के पास इसलिए मनुष्य के तुलसी की माला गले मे माला स्वत: ही फिरती है। यहां बडे बडे महाराजाओ ने विश्व जीतने का दावा करते है, किंतु उनकी मौत के बाद भी सब यही छोड़ खाली हाथ ही जाते है। जिस प्रकार सरकार अपने से टेक्स लेती है ओर अनुदान के रूप में पैसा देती है वैसे ही अपना कमाया ही काम आएगा। कथा सातवे दिन समापन अवसर पर मुख्य यजमान द्धारा विशाल भण्डोरे का आयोजन किया गया। समापन के अवसर पर समिति के सदस्यों का भी सम्मान किया गया। कथा में राठौड बस संचालक राजेश राठौड को क्षेत्र में बस के मााध्यम से कथा स्थल तक लाने के लिए बस सेवा के की इससे राजेश राठौड को शाल व पगडी बांध कर सम्मानित किया गया। वही पत्रकार कांतिलाल राठौड को भी पं. कमलकिशोर नागरजी ने प्रतिदिन अखबार के माध्यम से समाचार प्रकाशित कर जनजन तक कथा का लाभ पहुचाने के लिए शाल भेटकर सम्मानित किया गया।

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